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Wednesday, 27 March 2019
Thursday, 30 August 2018
हिन्दी पिल्मों में राखी गीत
हिन्दी पिल्मों में राखी गीत
रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन वेफ् अटूट स्नेह को प्रदर्शित करने ज्ञााला है। इस कार आधारित गीतो ने श्रोताओं वेफ् दिल कार अमिट छाका छोत्रडी है।
निर्माता एल ज्ञाी प्रसाद की 1959 में प्रदर्शित फिल्म 'छोटी बहन' संभज्ञातः काहली फिल्म थी, जिसमें भाई-बहन वेफ् कयार भरे अटूट रिश्ते को रुकाहले कारदे कार दिखाया गया था। इस फिल्म में बलराज साहनी ने बडे भाई और नन्दा ने छोटी बहन की भूमिका निभायी थी। शैलेन्द्र का लिखा और लता मंगेशकर द्वारा गाया फिल्म का यह गीत 'भइया मेरे राखी वेफ् बंधन को निभाना..' बेहद लोकप्रिय हुआ था। रक्षाबंधन वेफ् गीतों में इस गीत का ज्ञिाशिष्ट स्थान आज भी बरकरार है।
निर्माता. निर्देशक ए. भीम सिंह ने भाई.बहन वेफ् रिश्ते कार आधारित दो फिल्में-राखी और भाई बहन बनायीं। ज्ञार्ष 1962 में प्रदर्शित फिल्म रॉखी में अशोक वुफ्मार और ज्ञाहीदा रहमान ने भाई-बहन की भूमिका निभायी थी। ज्ञार्ष 1968 में प्रदर्शित भाई-बहन में सुनील दत्त और नूतन मुख्य भूमिकाओं में थे।
इसी दौर में अनकाढ (1962)और काजल फिल्म में भाई-बहन वेफ् काज्ञिात्र प्रेम कार दो खूबसूरत गीत कोश किए गए। इनमें अनकाढ का माला सिन्हा कार लता मंगेशकर की आज्ञााज में फिल्माया गीत-रंग बिरंगी राखी लेकर आई बहना... आज भी दर्शकों और श्रोताओं को अभिभूत कर देता है। काजल फिल्म में बलराज साहनी भाई की भूमिका में थे। फिल्म में मीना वुफ्मारी कार बेहद खूबसूरत गीत -'मेरे भइया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन' का फिल्मांकन किया गया था। रज्ञिा वेफ् संगीत निर्देशन में इस गीत को काार्श्व गायिका आशा भोंसले ने स्ज्ञार दिया था।
बिमल राय की बंदिनी में भी यह बेहद मार्मिक गीत था. जिसमें बहन अकाने किाता से भाई को साज्ञान में भेजने का अनुरोध करती है-'अब वेफ् बरस भेज भइया को बाबुल साज्ञान में दीजो बुलाय रे।' बहन की ज्ञयथा को बतलाने ज्ञााले शैलेन्द्र के लिखे और एस डी बर्मन वेफ् स्ज्ञारबध्द किये इस गीत को भी आशा भोंसले ने अकाना कर्णप्रिय स्ज्ञार दिया था।
सुनील दत्त और जयश्री को लेकर 'दीदी' नाम से एक फिल्म भी बनी थी, जिसमें लता मंगेशकर की आज्ञााज में जयश्री कार एक सुमधुर गीत 'मेरे भइया को संदेसा काहुंचाना कि चंदा तेरी जोत जले' का फिल्मांकन किया गया था1 फिल्म में सुनील दत्त भाई की भूमिका में थे।
ज्ञार्ष 1971 में रिलीज ..हरे रामा हरे वृफ्ष्णा में देज्ञाानन्द और जीनत अमान ने भाई-बहन की भूमिका निभायी थी। फिल्म का गीत.. 'फूलों का तारों का सबका कहना है. एक हजारों में मेरी बहना है' आज भी सदाबहार गीतों में शामिल है, रेशम की डोरी, में सुमन कल्याणकाुर का गाया-'बहना ने भाई की कलाई से कयार बांधा है' रक्षाबंधन कार आज भी रेडियो कार खूब बजता है।
इसी तरह फिल्म बेईमान का 'ये राखी बंधन है ऐसा' (सच्चा झूठा), 'मेरी कयारी बहनिया बनेगी दुल्हनियां' (चम्बल की कसम', 'चंदा रे मेरे भइया से कहना' (कयारी बहना), राखी वेफ् दिन...(हम साथ साथ हैं), 'छोटे छोटे भाइयों वेफ्' (तिरंगा), 'इसे समझो न रेशम का तार' (रिश्ता कागज का), 'ये राखी की लाज तेरा भइया निभायेगा) आदि गीत भी काफी लोकप्रिय हुए।
कुछ समय भाई-बहन वेफ् रिश्तों कार आधारित फिल्मों में रॉखी का एक न एक गीत जरूर हुआ करता था लेकिन अब न तो इस तरह की फिल्में बन रही है और न ही रॉखी वेफ् गीत लिखे जा रहे है। तीन-चार साल काहले तक भी भाई-बहन वेफ् स्नेहकाूर्ण अटूट संबंधों को चित्रित करने ज्ञााली फिल्में बनती रही हैं लेकिन उनमें रक्षा बंधन को लेकर कोई गीत नहीं था और अब तो यह सिलसिला लगभग टूट ही गया है।
Friday, 19 January 2018
UPPSC RO AND ARO परीक्षा योजना
UPPSC, ALLAHABAD
परीक्षा योजना तथा
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम
1- सामान्य अध्ययन (वस्तुनिष्ठ प्रकारक)
समय- दो घन्टे प्रश्न- 140 पूर्णांक-
140
1. सामान्य
विज्ञान, 2. भारत का इतिहास, 3. भारतीय राष्ट्रीय
आन्दोलन, 4. भारतीय राज्य तंत्र, अर्थव्यवस्था एवं
संस्कृति, 5. भारतीय कृषि, वाणिज्य एवं व्यापार, 6. जनसंख्या , पर्यावरण एवं नगरीकरण (भारतीय परिप्रेक्ष्य में) 7. विश्व भूगोल तथा भारत का भूगोल और प्राकृतिक संसाधन, 8. अधुनातन
राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय महत्वपूर्ण घटनाक्रम, 9. सामान्य बौद्विक क्षमता, 10. उत्तर प्रदेश
की शिक्षा़, संस्कृति, कृषि, उद्योग, व्यापार एवं रहन-सहन और सामाजिक प्रथाओं के
सम्बन्ध में विशिष्ट जानकारी।
2- सामान्य हिन्दी
(प्रारम्भिक परीक्षा)
(सामान्य शब्द ज्ञान एवं व्याकरण)
(वस्तुनिष्ठ) (Objective)
समय- एक घन्टा प्रश्न- 60 पूर्णांक-
60
¼i½
विलोम (10 शब्द)
¼ii½
वाक्य एवं वर्तनी शुद्धि (10 वाक्य)
¼iii½
अनेक शब्दो के एक शब्द (10 शब्द)
¼iv½
तत्सम एवं तद्भव शब्द (10 शब्द)
¼v½
विशेष्य और विशेषण (10 शब्द)
¼vi½
पर्यायवाची शब्द (10 शब्द)
योग 200 अंक
परिशिष्ट - 5
मुख्य परीक्षा
हेतु पाठ्यक्रम
1- सामान्य अध्ययन
(प्रारम्भिक परीक्षा जैसा)
समय - दो घन्टे प्रश्न - 120
पूर्णांक - 120
2- सामान्य हिन्दी एवं आलेखन
खण्ड-1 (परम्परागत) (Subjective)
समय - ढाई घन्टे पूर्णांक - 100
(1) दिये हुए गद्यांश का
शीर्षक, सारांश एवं तीन रेखांकित
अंशों की व्याख्या 3+6+12 21 अंक
(2) किसी दिये हुए सरकारी
पत्र का सारिणी रूप (Tabular
Form ) में सार लेखन। 15 अंक
(3) पत्राचार 24 अंक
¼i) शासकीय/अर्द्धशासकीय पत्र
¼ii½
कार्यालय
आदेश/ज्ञाप/परिपत्र
¼iii½
विज्ञप्ति/टिप्पण एवं
प्रतिवेदन/अनुस्मारक
(4) पारिभाषिक शब्दावली
(प्रशासनिक एवं वाणिज्यिक शब्दावली)
¼i) अंग्रेजी से हिन्दी (पांच शब्द) 10 अंक
¼ii½
हिन्दी से अंग्रेजी (पांच शब्द) 10 अंक
¼iii½
मुहावरे तथा लोकोक्तियां (केवल 05) 10 अंक
(5) कम्प्यूटर ज्ञान 10 अंक
खण्ड - 2
सामान्य शब्द ज्ञान एवं
व्याकरण (वस्तुनिष्ठ) (Objective)
समय - आधा घन्टा पूर्णांक
- 60
¼i)
विलोम (6 शब्द) 12 अंक
¼ii½
वाक्य एवं वर्तनी शुद्धि (6 वाक्य) 12 अंक
¼iii½
अनेक शब्दां के एक शब्द (6 शब्द) 12 अंक
¼iv½
तत्सम एवं तद्भव शब्द (6 शब्द) 12 अंक
¼v½
विशेष्य और विशेषण (6 शब्द) 12 अंक
3- हिन्दी निबन्ध
समय - तीन घन्टे पूर्णांक
- 120
इस प्रश्न पत्र के अन्तर्गत तीन प्रश्न होंगे। प्रत्येक
प्रश्न के एक-एक शीर्षक (क/ख/ग) का चयन करते हुए (दी गयी शब्द सीमा में) कुल तीन
निबन्ध लिखने होंगे।
(1) (क) साहित्य और संस्कृति शब्द
सीमा 600 40 अंक
(ख) सामाजिक क्षेत्र
(ग) राजनीतिक क्षेत्र
(2) (क) विज्ञान, पर्यावरण एवं
प्रौद्योगिकी शब्द सीमा 600 40 अंक
(ख) आर्थिक क्षेत्र
(ग) कृषि एवं व्यापार
(3) (क) राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय घटनाक्रम शब्द सीमा 600 40 अंक
(ख) प्राकृतिक आपदायें-भूस्खलन, चक्रवात, भूकम्प, बाढ़, सूखा इत्यादि।
(ग) राष्ट्रीय विकास योजनायें
¼120+160+120=400½
समीक्षा अधिकारी (हिन्दी)
तथा समीक्षा अधिकारी (उर्दु) पदों हेतु अभ्यर्थियों के लिए पाठ्यक्रम सम्बन्धी
विशेष अनुदेशः-
मुख्य परीक्षा
में समीक्षा अधिकारी (हिन्दी) तथा समीक्षा अधिकारी (उर्दु) पद हेतु निर्धारित
पाठ्यक्रमानुसार अनुवाद के पृथक से एक-एक अर्हकारी प्रकृति (Qualifying Nature) के अतिरिक्त प्रश्न पत्र होंगे। उक्त
प्रश्न-पत्र परम्परागत प्रकारक होंगे, जिनकी समयावधि 3 घंटे तथा
पूर्णांक 100 होगा। समीक्षा
अधिकारी (हिन्दी) एवं समीक्षा अधिकारी (उर्दु) के पदों हेतु अधिमान्यता प्रदान
करने वाले अभ्यर्थियों को अनुवाद के उक्त प्रश्न-पत्र में न्यूनतम 33 : अर्थात 100 में 33 अंक प्राप्त
किया जाना अनिवार्य होगा। 33 : से कम अंक प्राप्त
करने वाले अभ्यर्थियों को प्रश्नगत दोनों पदों हेतु अपात्र माना जायेगा। उपर्युक्त
पदों हेतु केवल वहीं अभ्यर्थी पात्र माने जायेंगे, जिन्होंने अपने आन-लाइन आवेदन में उक्त पदों हेतु दावा किया
है एवं प्रारम्भिक परीक्षा के आधार पर मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए सफल
घोषित किये गये हैं। प्रश्नगत् पदों पर चयन हेतु परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की
मेरिट का निर्धारण सभी अभ्यर्थियों के साथ मुख्य परीक्षा में अर्जित कुल
प्राप्ताकों के आधार पर किया जायेगा अर्थात् अन्तिम चयन सूची में अभ्यर्थियों की
श्रेष्ठता के निर्धारण में उक्त अर्हकारी प्रश्न-पत्रों के अंकों को नहीं जोड़ा जायेगा।
उपरोक्त पदों हेतु अनुवाद
सम्बन्धी प्रश्नपत्रों का पाठ्यक्रम निम्नवत् है-
Syllabus for Samiksha Adhikari (Hindi)
Translation from English to Hindi and
from Hindi to English
Max. Mark- 100
Time-3Hrs.
Part-1
(Translation from English to Hindi)
Syllabus
1-
Translation
from English to Hindi of an extract from a Press Communique,
Press Article or Government
Resolution.
30 Marks
2-
Translation
from English to Hindi of a section or some Sections
of an act of the legislature. 10
Marks
3-
Explanation
of common expressions, clichés etc, which might be met
with in either of the above,
technical-official words. 10
Marks
Part-2
(Translation
from Hindi to English)
4-
Translation
of a portion of news paper article, speech, letter etc. 30 Marks
5-
Translation
of words and expressions commonly used in the
above circumstances into idiomatic
equivalents in English. 10
Marks
6-
Explanation
of common expressions, clichés etc, which might
be met with in either of the above,
technical-official words. 10
Marks
Syllabus for Samiksha Adhikari (Urdu)
Translation from English to Urdu and
from Urdu to English
Max
Marks-100
Time-3Hrs.
Part-1
(Translation from English to Urdu)
1-
Translation
from English to Urdu of an exract from a Press Communique,
Press Article or Government
Resolution. 30
Marks
2-
Translation
from English to Urdu of a section or some Sections of
an act of the legislature. 10
Marks
3-
Explanations
of common expressions, clichés etc, which might be met
with in either of the above,
technical-official words. 10
Marks
Part-2
(Translation
from Urdu to English)
4-
Translation
of a portion of news paper article, speech, letter etc. 30 Marks
5-
Translation
of words and expressions commonly used in the above
circumstances into idiomatic
equivalents in English. 10
Marks
6-
Explanation
of common expressions, clichés etc, which might be
met
with in either of the above technical-official words. 10
Marks Saturday, 21 December 2013
जीवन के प्रति नजरिया विकसित करें
जीवन के प्रति नजरिया विकसित करें
हर व्यक्ति चाहे वह स्त्री हो या पुरुष आत्म सम्मान पूर्वक जिंदगी जीना चाहता है व स्वयं को उपलब्धियों व कामयाबियों के शिखर पर देखना चाहता है। इन सब बातों में आत्मविश्वास बनाये रखना निहायत ही जरूरी है। कई बार ऐसा होता है कि दूसरे व्यक्ति को अपने से ज्यादा साधन संपन्न व पैसे वाला पाकर हम स्वयं को हीन महसूस करते हैं। ये हमारे आत्मविश्वास की कमी का परिणाम है। स्वयं को किसी से कमतर न आंकें व स्वयं के गुणों में वृध्दि करें।
अपनी योग्यताओं को जानें
अपने आत्म सम्मान को आहत करने की बजाय आप अपनी खूबियों को पहचानें। वह समझें कि हर दुख के पीछे सुख और अंधकार के पीछे प्रकाश छिपा होता है। कामकाज के क्षेत्र में कभी भी खुद की तुलना अपने अन्य सहकर्मियों से न करें। अधिकतर कामकाजी महिलाएं अपनी तुलना अन्य सहकर्मियों से करती हैं और ऐसा कर वे स्वयं को हीन या कमतर महसूस करती हैं। याद रखिए हर व्यक्ति में खूबियां और खामियां दोनों ही होती है। कामकाजी महिलाओं को यह बातें समझना चाहिए कि नौकरी करना ही जिंदगी नहीं है। जीवन में नौकरी के अलावा और भी बहुत कुछ है। इस सच को समझें कि जीवन में पैसा बहुत कुछ होता हैपर सब कुछ नहीं होता। नौकरी आपको कुछ करने का आपके व्यक्तित्व की रिक्तता को भोगने का सशक्त माध्यम है।
जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण अपनाएं
एक मनोवैज्ञानिक का कहना है कि उनके पास अनेक सुंदर महिलाएं आती हैं। जो अपनी सुंदरता के बारे में कम ही ख्याल रखती है। वे देखने में तो निहायत सुंदर हैं पर खुद को मन से बदसूरत समझती हैं। उनके अनुसार ऐसी सोच वाली महिलाओं को आत्म विश्लेषण करना चाहिए और उन्हें इस कार्य में अपनी किसी अंतरंग सहेली या दोस्त की मदद लेनी चाहिए।
अपनी मदद स्वयं करें
आप ही अपने आत्मसम्मान की रक्षा कर सकती हैं। इन संदर्भ में कोई दूसरा आपकी मदद नहीं कर सकता। आत्म सम्मान का यह भाव मात्र एक दिन में ही पैदा नहीं होता। जैसे कि एक इमारत ईंट दर ईंट रखकर तैयार होती है ठीक वैसे ही आत्मसम्मान का भावभी एक एक संकल्प से पैदा होता है।
स्वास्थ्य का रखें ध्यान
अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा कदापि न करें। योगासन व व्यायाम करें। पौष्टिक आहार करें। पानी जमकर पिए। खानपान में फलों को जरूर स्थान दें। स्वास्थ्य अच्छा रहने से जहां आपकी कार्यक्षमता बत्रढेगी वहीं आपकी महत्ता का भी बोध होगा।
तलाशें अपनी प्रतिभा
हर व्यक्ति को प्रकृति ने कुछ न कुछ विशिष्ट शक्ति प्रदान की है। आप में भी प्रतिभा मौजूद है। जरूरत इस बात की है कि आप अपनी उस छिपी प्रतिभा को तलाशें।
करें आत्म प्रेम
आप जैसी हैं जो भी हैं उसी रूप में स्वयं की कमियों को भी स्वीकारें, स्वयं को प्यार करें। आत्मप्रेम का भाव जागृत करने की इस मनोवैज्ञानिक विधि पर अमल करें। खुद को सराहें और स्वयं को देखकर मंद-मंद मुस्कुराएं।
Friday, 9 November 2012
अच्छे काम का पुरस्कार
एक बूढ़ा रास्ते से कठिनता से चला जा रहा था। उस समय हवा बड़े जोरों से चल रही थी। अचानक उस बूढ़े की टोपी हवा से उड़ गई।
उसके पास होकर दो लड़के स्कूल जा रहे थे। उनसे बूढ़े ने कहा-
मेरी टोपी उड़ गई है, उसे पकड़ो। नहीं तो मैं बिना टोपी का हो जाऊंगा।
वे लड़के उसकी बात पर ध्यान न देकर टोपी के उड़ने का मजा लेते हुए हंसने लगे। इतने में लीला नाम की एक लड़की, जो स्कूल में पढ़ती थी, उसी रास्ते पर आ पहुंची।
गुरुजी ने टोपी वाली यह घटना स्कूल की खिड़की से देखी थी। इसलिए पढ़ाई के बाद उन्होंने सब विद्यार्थियों के सामने वह टोपी वाली बात कही और लीला के काम की प्रशंसा की तथा उन दोनों लड़कों के व्यवहार पर उन्हें बहुत धिक्कारा।
शिक्षा
जो लड़के गरीब की टोपी उड़ती देखकर हंसे थे, वे इस घटना का देखकर बहुत लज्जित और दुखी हुए।
अपना दीपक बनो
दो यात्री धर्मशाला में ठहरे हुए थे। एक दीप बेचने वाला आया। एक यात्री ने दीप खरीद लिया। दूसरे ने सोचा, मैं भी इसके साथ ही चल पडूंगा, मुझे दीप खरीदने की क्या जरूरत है। दीप लेकर पहला यात्री रात में चल पड़ा, दूसरा भी उसके साथ लग लिया। थोड़ी दूर चलकर पहला यात्री एक ओर मुड़ गया। दूसरे यात्री को विपरीत दिशा में जाना था। वह वहीं रह गया। बिना उजाले के लौट भी नहीं पाया। महात्मा बुद्ध ने कहा- भिक्षुओं! अपना दीपक बनो। अपने कार्य ही अपने दीप हैं। वही मार्ग दिखाएंगे।
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Thursday, 27 September 2012
LATA MANGESHKAR
जन्म दिवस 28 सितम्बर पर विशेष
भारत रत्न लता मंगेशकर
कोकिल कंठ लता मंगेशकर के बारे में उस्ताद अमजद अली खां का मानना है कि अगर ताजमहल सातवां अजूबा है तो लतामंगेशकर आठवां। उस्ताद बडे गुलाम अली खां उन्हें तीन मिनट की जादूगरनी कहा था। लता जन्म 28 सितम्बर 1929 को शनिवार की रात्रि में दस बजकर तीस मिनट पर अपनी मौसी के घर इन्दौर (मध्य प्रदेश) भारत में हुआ। बचपन में लता नूरजहां और सहगल के गीत गुनगुनाया करती थीं। जब यह 13 वर्ष की थी तो इनके पिता मास्टर दीनानाथ मंगेशकर क निधन हो गया जो एक संगीत नाटक कंपनी चलाते थे। अब घर की सारी जिम्मेदारी लता के कंधों पर आन पडी। अपनी चार बहनों और एक भाई में सबसे बडी लता को इनके चाचा मास्टर विनायक ने अपनी कंपनी में बालकलाकार के रूप में काम देकर इनकी सहायता की। इनका बचपन में हेमा नाम रखा गया। बचपन में इनके पिता जी इन्हें प्यार से हृदया पुकारते थे। इसके बाद इनका नाम लता हो गया। बचपन में अपने उस्ताद अमानत अमान अली से फिर उस्ताद अमानत खां देवास वाले तथा उस्ताद बडे गुलाम अली खां के शागिर्द पं. तुलसी दास शर्मा आदि महान गायकों से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। इनको सुगम संगीत से बेहद लगाव रहा। इतना अनुभव प्राप्त करने के पश्चात लता ने आरंभ में कुछ हिन्दी फिल्मों -बत्रडी मां (1945), जीवन यात्रा (1946), मन्दिर (1948) और छत्रपति शिवाजी (1952), आदि में अभिनय किया। इसके अतिरिक्त लता ने 5 मराठी फिल्मों में अभिनय भी किया।
9वर्ष की उम्र में पहली बार शास्त्रीय गायन पेश करने वाली गायिका तला मंगेशकर ने अपने जीवन का सबसे पहला हिन्दी फिल्मी पार्श्वगीत पा लांगू कर जोरी रे श्याम मुझसे न खेलो होरी रे, फिल्म आपकी सेवा में 1947 में गाया जिसके संगीतकार थे। दत्ता डावजेकर और गीतकार थे महिपाल। इस समय फिल्मों में - नूरजहां, शमशाद बेगम, जोहरा बाई अंबाला वाली, अमीर बाई कर्नाटकी, सुरैया, राजकुमारी जैसी सफल गायिकाएं मौजूद थीं और इनके सामने टिकना बत्रडा कठिन था। ठीक इसी समय समय ने करवट बदली और नौशाद, अनिल विश्वास, खेमचन्द्र प्रकाश, सी. रामचन्द्र, शंकर जय किशन तथा मदन मोहन जैसे महान संगीतकारों ने लता से गीत गवाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते सफलताएं इनके कदम चूमने लगीं। 1955 तक लता मंगेशकर अपने 1000 फिल्मी गीत गा चुकी थी। सभी नायिकाएं इनसे बहुत पीछे छूटती गयीं और लता का फिल्मी साम्राज्य स्थापित हो गया। हिन्दुस्तान में ही नहीं बल्कि सारी दुनिया में लता की सुरीली आवाज सुनने वालों के कानों में रस घोलती रहती है। लता कापूरा व्यक्तित्व ही एक सादगी और पवित्रता से भरा हुआ है।
लता के गाये हिन्दी फिल्मी गीतों कीं संख्या लगभग 6000 से कम है। लता ने नौशाद-155, शंकर जयकिशन-453, सी. रामचन्द्र- 298, मदन मोहन-210, अनिल विश्वास-123, हेमन्त कुमार- 139, चित्रगुप्त- 240, रवि-75, एस.डी. बर्मन - 182, आर.डी. बर्मन- 327, एल.पी- 666, कल्याणजी आनंद जी- 297, हुस्न लाल भगत राम- 107, आदि संगीतकारों के लिए स्वर दिया। इनके नाम पर मध्य प्रदेश सरकार ने 1984 से सुगम संगीत के क्षेत्र में अखिल भातरीय स्तर पर एक लाख रुपये का पुरस्कार देना आरम्भ किया है। अब तक यह नौशाद, किशोर, जयदेव, मन्ना डे, खय्याम, आशाभोंसले सहित कई फिल्मी हस्तियों को यह पुरस्कार मिल चुका है। भारत सरकार ने 1969 में पद्भभूषण प्रदान किया। सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायन के लिए लता जी को 4 बार फिल्मफेयर अवार्ड इन गीतों के लिए हासिल हुआ। फिल्म उद्योग और संगीत की उच्चतम सेवा के लिए फिल्म जगत के सर्वश्रेष्ठ दादा फाल्के पुरस्कार से 1989 में सम्मानितकिया गया। महान गायिका लता मंगेशकर को भारत के सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न से मार्च, 2001 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन ने अलंकृत किया।
भारत रत्न लता मंगेशकर
कोकिल कंठ लता मंगेशकर के बारे में उस्ताद अमजद अली खां का मानना है कि अगर ताजमहल सातवां अजूबा है तो लतामंगेशकर आठवां। उस्ताद बडे गुलाम अली खां उन्हें तीन मिनट की जादूगरनी कहा था। लता जन्म 28 सितम्बर 1929 को शनिवार की रात्रि में दस बजकर तीस मिनट पर अपनी मौसी के घर इन्दौर (मध्य प्रदेश) भारत में हुआ। बचपन में लता नूरजहां और सहगल के गीत गुनगुनाया करती थीं। जब यह 13 वर्ष की थी तो इनके पिता मास्टर दीनानाथ मंगेशकर क निधन हो गया जो एक संगीत नाटक कंपनी चलाते थे। अब घर की सारी जिम्मेदारी लता के कंधों पर आन पडी। अपनी चार बहनों और एक भाई में सबसे बडी लता को इनके चाचा मास्टर विनायक ने अपनी कंपनी में बालकलाकार के रूप में काम देकर इनकी सहायता की। इनका बचपन में हेमा नाम रखा गया। बचपन में इनके पिता जी इन्हें प्यार से हृदया पुकारते थे। इसके बाद इनका नाम लता हो गया। बचपन में अपने उस्ताद अमानत अमान अली से फिर उस्ताद अमानत खां देवास वाले तथा उस्ताद बडे गुलाम अली खां के शागिर्द पं. तुलसी दास शर्मा आदि महान गायकों से संगीत की शिक्षा प्राप्त की। इनको सुगम संगीत से बेहद लगाव रहा। इतना अनुभव प्राप्त करने के पश्चात लता ने आरंभ में कुछ हिन्दी फिल्मों -बत्रडी मां (1945), जीवन यात्रा (1946), मन्दिर (1948) और छत्रपति शिवाजी (1952), आदि में अभिनय किया। इसके अतिरिक्त लता ने 5 मराठी फिल्मों में अभिनय भी किया।
9वर्ष की उम्र में पहली बार शास्त्रीय गायन पेश करने वाली गायिका तला मंगेशकर ने अपने जीवन का सबसे पहला हिन्दी फिल्मी पार्श्वगीत पा लांगू कर जोरी रे श्याम मुझसे न खेलो होरी रे, फिल्म आपकी सेवा में 1947 में गाया जिसके संगीतकार थे। दत्ता डावजेकर और गीतकार थे महिपाल। इस समय फिल्मों में - नूरजहां, शमशाद बेगम, जोहरा बाई अंबाला वाली, अमीर बाई कर्नाटकी, सुरैया, राजकुमारी जैसी सफल गायिकाएं मौजूद थीं और इनके सामने टिकना बत्रडा कठिन था। ठीक इसी समय समय ने करवट बदली और नौशाद, अनिल विश्वास, खेमचन्द्र प्रकाश, सी. रामचन्द्र, शंकर जय किशन तथा मदन मोहन जैसे महान संगीतकारों ने लता से गीत गवाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते सफलताएं इनके कदम चूमने लगीं। 1955 तक लता मंगेशकर अपने 1000 फिल्मी गीत गा चुकी थी। सभी नायिकाएं इनसे बहुत पीछे छूटती गयीं और लता का फिल्मी साम्राज्य स्थापित हो गया। हिन्दुस्तान में ही नहीं बल्कि सारी दुनिया में लता की सुरीली आवाज सुनने वालों के कानों में रस घोलती रहती है। लता कापूरा व्यक्तित्व ही एक सादगी और पवित्रता से भरा हुआ है।
लता के गाये हिन्दी फिल्मी गीतों कीं संख्या लगभग 6000 से कम है। लता ने नौशाद-155, शंकर जयकिशन-453, सी. रामचन्द्र- 298, मदन मोहन-210, अनिल विश्वास-123, हेमन्त कुमार- 139, चित्रगुप्त- 240, रवि-75, एस.डी. बर्मन - 182, आर.डी. बर्मन- 327, एल.पी- 666, कल्याणजी आनंद जी- 297, हुस्न लाल भगत राम- 107, आदि संगीतकारों के लिए स्वर दिया। इनके नाम पर मध्य प्रदेश सरकार ने 1984 से सुगम संगीत के क्षेत्र में अखिल भातरीय स्तर पर एक लाख रुपये का पुरस्कार देना आरम्भ किया है। अब तक यह नौशाद, किशोर, जयदेव, मन्ना डे, खय्याम, आशाभोंसले सहित कई फिल्मी हस्तियों को यह पुरस्कार मिल चुका है। भारत सरकार ने 1969 में पद्भभूषण प्रदान किया। सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायन के लिए लता जी को 4 बार फिल्मफेयर अवार्ड इन गीतों के लिए हासिल हुआ। फिल्म उद्योग और संगीत की उच्चतम सेवा के लिए फिल्म जगत के सर्वश्रेष्ठ दादा फाल्के पुरस्कार से 1989 में सम्मानितकिया गया। महान गायिका लता मंगेशकर को भारत के सर्वोच्च अलंकरण भारत रत्न से मार्च, 2001 में तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन ने अलंकृत किया।
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